राम कृष्ण की धरती जिसमें बहती गंगा धारा
योग ध्यान से सिंचित होता भूमंडल है सारा
गणित विज्ञान का वेदों में है, भरा हुआ भंडारा
वीरों की गाथा से गुंजित, देश ये भारत प्यारा
चंद्रयान से गड़ा तिरंगा, मंगल नहीं है दूर
दुश्मन छाती चीर दिया है, ऑपरेशन सिन्दूर
राडार की आँख फोड़ दी, चीन हो गया फीका
f-16 के परखचे उड़ गये, दहशत में अमरीका
सोने की चिड़िया भारत अब, पुनः हुआ धनवान
चौथी आर्थिक महाशक्ति यह, चढ़ता गया परवान
हुंकार भरो तुम देशवासियों, बजे गगन में डंका
यदि कोई दुश्मनी ठान ले, लगा दो उसकी लंका
Jan 27, 2026
देशभक्ति
बुन्देली
बलशाली, करे शेर की सवारी, धार तलवार पे चले वो चिनगारी थी
बरछी की सहेली, अंग्रेजों की पहेली, पूरी महाकाल वो झांसी वाली रानी थी
पण्डित
जनेऊधारी, योद्धा बंदूकधारी, फिरंगियों के लिए साक्षात यमराज था
छद्म भेषधारी, वो महान क्रांतिकारी, कोई और नहीं चंद्रशेखर आजाद था
ओजस्वी थी वाणी, सिविल सर्विस लात
मारी, बनाई राजभाषा वो हिन्दी हमारी थी
चाणक्य था सुभाष, किया अंग्रेजों का नाश, दिलाई उसी ने पहली बार आजादी थी
बम फेंका था तान, खोला अंग्रेजों का
कान, सूली पे चढ़ा वो जब आई तरुणाई थी
वध सैंडर्स का, जुनून प्रतिशोध का, गर्दन जकड़ी तो आई फाँसी फंदे को रुलाई थी
दासता हजार साल, कष्ट था बड़ा विशाल, पूर्वज
हमारे बहुते दुखदाई थे
ज्ञान के बड़े धनी, शौर्य में नहीं कमी, एक न हुये आपस में लड़ाई थी
नेपाल में उत्पात, बांग्लादेश में
बवाल, पाकिस्तान तो पुराना घुटा हुआ बलवाई है
जल गई है लंका, भड़का बर्मा में है दंगा, भारत में आपदा चहुँ ओर से आई है
भगत राजगुरु अशफाकउल्ला, फांसी पर
कितने झूल गये
स्वतंत्र भारत मेँ जन्म लिया, आजादी की कीमत भूल गये
मंगल हो या सोम, करते वर्क फ्रॉम होम,
आज की पीढ़ी एकदम अलसाई है
हुआ धर्म से दुराव, टूटा देश से जुड़ाव, छूट गया परिवार परदेश घर बसाई है
जाके विदेश बजाओ डंका, रहो अमरीका या
लंका, तार दिल के न कटें कभी देश से
अपनी संस्कृति न भूलो, माता पिता पैर चूमो, जुड़े रहो सदा अपने धर्म भूषा वेश से
कुवैत से निकाला, यूक्रेन से ले आया, परदेश में फंसे तो भारत माता काम आई है
देश से विदेश तक, मंगल से चंदरेश तक, सबके प्रयास से मिली तिरंगे को ऊंचाई है
बरछी की सहेली, अंग्रेजों की पहेली, पूरी महाकाल वो झांसी वाली रानी थी
छद्म भेषधारी, वो महान क्रांतिकारी, कोई और नहीं चंद्रशेखर आजाद था
चाणक्य था सुभाष, किया अंग्रेजों का नाश, दिलाई उसी ने पहली बार आजादी थी
वध सैंडर्स का, जुनून प्रतिशोध का, गर्दन जकड़ी तो आई फाँसी फंदे को रुलाई थी
ज्ञान के बड़े धनी, शौर्य में नहीं कमी, एक न हुये आपस में लड़ाई थी
जल गई है लंका, भड़का बर्मा में है दंगा, भारत में आपदा चहुँ ओर से आई है
स्वतंत्र भारत मेँ जन्म लिया, आजादी की कीमत भूल गये
हुआ धर्म से दुराव, टूटा देश से जुड़ाव, छूट गया परिवार परदेश घर बसाई है
अपनी संस्कृति न भूलो, माता पिता पैर चूमो, जुड़े रहो सदा अपने धर्म भूषा वेश से
देश से विदेश तक, मंगल से चंदरेश तक, सबके प्रयास से मिली तिरंगे को ऊंचाई है
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