हिन्दू जीवन, हिन्दू तन मन, हिन्दू प्राण हमारा है
इस मिट्टी का हर कंकर, पूरा आकाश हमारा है
सनातनी हर बाला है, हर बालक अविनाशी है
हर आवास है तपोभूमि, हर गृहस्थ
सन्यासी है
कपटी कुटिल शत्रुओं की हम, जीवित चिता बना देंगे
धर्मध्वजा की रक्षा में हम, अपने शीश
कटा देंगे
राम
भक्त हम शांत सरोवर, नमन सभी को करते हम
बनकर परशुराम संकट में, दुश्मन दमन भी करते हम
अमरनाथ
से रामेश्वर तक, घर घर अलख जगाना है
सोमनाथ
से कामाख्या तक, सोते सिंह उठाना है
न कोई
बनिया, न कोई ब्राह्मण, न ठाकुर न लाला है
सतरंगों
में बुने हुये हम , सनातनी एक माला हैं।
