Nov 25, 2025

मानवता

घर बनता है घर वालों से

न कि स्वर्णिम दीवालों से

 

उम्र गुजार दी सारी, ताजमहल बनवाने में

किन्तु अन्त में शाहजहाँ, मरा कैदखाने में

 

बना गया जो विश्व में, अजूबा ताज महान

क्या बना पाया बेटे को, एक अच्छा इंसान

 

लगी होड आज भी केवल, किताबी ज्ञान पिलाने की

चाह नहीं संस्कारों वाला, नैतिक पाठ पढ़ाने की

 

डाक्टर इंजीनियर नेता ब्यूरोक्रेट, सब एक से एक हैं ज्ञानी

भ्रष्टाचार देशद्रोह सामाजिक पतन में, इनका नहीं है सानी

 

आरंभ हो चयन प्रक्रिया में, नैतिक परीक्षा अनिवार्य

पदासीन हो उच्चासन पर, केवल श्रेष्ठ सच्चा आर्य

Feb 28, 2025

बेटी

 

बेटा तभी तक बेटा है माई

जब तक नहीं बहू घर आई

बाबुल के घर से मिली जुदाई

तदपि बेटी कभी न हुई पराई

किया अगर मायके की बुराई

तो वो बन जाती दुर्गा माई

 

मायका तो छूटा, पर न टूटा हौसला

मिट्टी से अलग होकर, बनाया है घोंसला

ससुराल रोशन कर दिया, बन दिये की तेल  

अपनी जड़ों से टूटकर , बढाई है वंशबेल

 

बेटी ही नहीं अब तो है बेटों की विदाई

परदेश में दूर जाकर नौकरी है जमाई

पिता अकेले घर में करे दीवाल से बातें

बेटे मरणोंपरांत भी, नहीं देखने आते

 

घूम गया काल का पहिया, बदल गई सोच वो टेढ़ी

बेटी नहीं बेटों से कमतर, नहीं रही वो पैर की बेड़ी

 नहीं रही वो अबला नारी, नहीं बाबुल पे बोझ समान

फौज की जांबाज लड़ाकू, राफेल में बैठ उड़े आसमान    

 

बुढ़ापे की लाठी बन, देती माँ को सहारे

चिता में देने आग, पिता पुत्री को निहारे  

पुरखों की वंशबेल अब, बेटियाँ भी बढ़ाती

संपत्ति में समान भाग, सरकार  दिलाती  

 

कह डीके कविराय, सुनो हे गोवर्धन गिरधारी

हर घर आँगन में गूँजे, एक बेटी की किलकारी